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Tuesday, 6 February 2018

एमू पालन

एमू नहीं उड़ सकने वाले पक्षियों (रेटाइट) के समूह के सदस्य हैं, जिसके मांस, अंडे, तेल, त्वचा तथा पंखों की अच्छी कीमत मिलती है। ये पक्षी कई तरह की मौसमी दशाओं के लिए अनुकूलित होते हैं। भले ही एमू और शतुरमुर्ग भारत के लिए नए हैं, पर एमू पालन को यहां महत्व मिल रहा है।
रेटाइट पक्षियों के पंख कम विकसित होते हैं, जैसे एमू, शतुरमुर्ग, रीया, कैसोवरी और कीवी इस समूह में शामिल है। एमू तथा शतुरमुर्ग का पालन व्यावसायिक रूप से दुनिया के कई भागों में किया जाता और उनसे मांस, तेल, त्वचा तथा पंख प्राप्त किए जाते हैं, जो कीमती होते हैं। इन पक्षियों की शारीरिक संरचना और दैहिक गुण तापीय तथा उष्ण कटिबंधीय मौसमी दशाओं के अनुकूल होते हैं। ये पक्षी गहन और अर्ध-गहन पालन विधि से उच्च रेशेदार खाने के साथ पाले जाते हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा चीन एमू के प्रमुख पालक देश हैं। एमू पक्षी भारतीय मौसम के प्रति अच्छी तरह से अनुकूलित हैं।

एमू के गुण


एमू की गरदन लंबी होती है, उसका सिर अपेक्षाकृत छोटा होता है, तीन अंगुलियां होती हैं और शरीर पंखों से ढंका रहता है। पक्षी के शरीर पर शुरुआत में (0-3 महीने) लंबी धारियां होती हैं, जो बाद में (4-12 महीने) धीरे-धीरे भूरी हो जाती है। वयस्क एमू में नीली गरदन तथा शरीर पर चित्तीदार पंख होते हैं। एक वयस्क एमू 6 फीट ऊंचा होता है, जिसका वजन 45-60 किलोग्राम होता है। पैर लंबे होते हैं, जिन पर कड़ी और सूखी जमीन पर चलने के लिए अनुकूल शल्की त्वचा होती है। एमू के प्राकृतिक भोजन में शामिल हैं, कीट, पौधों के कोमल पत्ते तथा चारे। ये विभिन्न प्रकार की सब्जियां तथा फल खाते हैं, जैसे गाजर, खीरा और पपीता इत्यादि। मादा एमू नर से कुछ ऊंची होती है, खास कर प्रजनन काल में जब नर भूखा भी रह सकता है। मादा एमू नर से अधिक प्रभावी होती है। एमू 30 सालों तक जीवित रहता है। यह 16 से अधिक सालों तक अंडे देता है। इन पक्षियों को जोड़े में या झुडों में पाला जा सकता है।
चूजों का प्रबंधन

एमू के चूजों का वजन 370 से 450 ग्राम (अंडे के वजन का 67% ) होता है, जो उनके आकार पर निर्भर करता है। पहले 48-72 घंटे चूजों को इंक्यूबेटर में रखा जाता है, ताकि पीतक का शीघ्र वशोषण तथा शुष्कन हो सके। 25-40 चूजों के लिए एक पालन गृह बनाएं, जिसमें प्रत्येक चूजे के लिए पहले 3 हफ्तों के लिए 4 वर्गफीट की जगह दें। पालन के लिए पहले 10 दिनों के लिए 90 डिग्री फॉरेनहाइट का तापमान दें और 3 से 4 हफ्तों के लिए 85 डिग्री फ़ॉरेनहाइट तापमान दें। सही तापमान से चूजे सही तरह से बनते हैं। पालन गृह में पर्याप्त पानी और चारा रखें। 2.5 फीट ऊंचा चिक गार्ड लगाएं ताकि चूजे बाड़े से बाहर न निकल सकें। पालन गृह में प्रत्येक 100 वर्गफीट के क्षेत्र में 40 वाट का बल्ब लगाएं। 3 हफ्ते के बाद चूजों के घेरे को बढ़ाकर पालन क्षेत्र को बढ़ाया जा सकता है, और बाद में इसे 6 हफ्तों के समय तक हटा दिया जाता है। चूजों के 10 किलो ग्राम वजन होने तक या 14 हफ्ते तक शुरुआत में दी जानी वाली सानी खिलाएं। पक्षियों के स्थान में पर्याप्त जगह होनी चाहिए, क्योंकि स्वस्थ रहने के लिए इन्हें दौड़ने-भागने की आवश्यकता होती है, जिसके लिए 30 फीट स्थान की जरूरत होती है। अतः बाहरी स्थान के लिए 40 चूजों के लिए जमीन का क्षेत्रफल 40 * 30 फीट होना चाहिए। जमीन आसानी से पानी द्वारा साफ होने वाली होनी चाहिए यानि उसमें सीलन न लगे।
ऐसा करें
  • बाड़े में अधिक पक्षी न रखें।
  • पहले कुछ समय के लिए स्वच्छ जल और एंटी-स्ट्रेस एजेंट दें।
  • पानी रोज साफ करें, नहीं तो स्वत: आने वाले जल की व्यस्था करें।
  • पक्षियों के आराम, भोजन, जल अंतर्गग्रहण, कचरे की स्थिति इत्यादि की नियमित निगरानी करें, ताकि कुछ सुधार करने की जरूरत हो तो आप जल्द उसे अमल में ला सकते हैं।
  • चूजे के स्वस्थ विकास और टांगों के टेढ़ेपन से बचने के लिए सही खनिज मात्रा तथा विटामिन दें।
  • बेहतर जैवसुरक्षा बहाल करने के लिए पालन के सभी प्रचनलों को व्यवहार में लाएं।
ऐसा न करें
  • गर्म समय के दौरान उन्हें कभी न उठाएं।
  • ये पक्षी आसानी से उत्तेजित हो जाते हैं। अतः बाड़े का माहौल शांत होना चाहिए।
  • ये पक्षी किसी भी वस्तु को आसानी से पकड़ सकते हैं, इसलिए कुछ चीजें जैसे, कील, छोटे पत्थरों को उनकी पहुंच से दूर रखें।
  • बाड़े में अनधिकृत व्यक्तियों तथा सामग्रियों को प्रवेश न करने दें। सही जैव-सुरक्षा अति महत्वपूर्ण है।
  • पक्षियों को कभी चिकनी सतह पर न रखें, बल्कि वहां धान की भूसी बिछा दें, क्योंकि चूजे आसानी से उत्तेजित हो जाते हैं और दौड़ने-भागने लगते हैं, जिससे उनकी टांगें टूट सकती है।

पालन प्रबंधन

एमू के चूजे जब बड़े होते हैं तो उन्हें बड़े आकार के पानी-चारा वाले वाले बरतनों और अधिक क्षेत्रफल वाले स्थान की जरूरत होती है। उनके लिगों को पहचानें और उन्हें अलग-अलग पालें। यदि जरूरी हो तो बाड़े में धान की पर्याप्त भूसी रखें, ताकि कचरों को सूखी स्थिति में रखा जा सके। चूजे तब तक 25 किलो ग्राम के या 34 हफ्ते तक के न हो जाएं, उन्हें वृद्धि बढ़ाने वाली सानी दें। उन्हें आहार के 10% हरे, खास कर पत्तियों के चारे भी दें ताकि उन्हें रेशेदार आहार खाने की आदत पड़ जाए। हर समय उन्हें स्वच्छ जल दें और जब भी उन्हें चारे की आवश्यकता हो, उपलब्ध कराएं। वृद्धि के चरण में हमेशा कचरों को सूखा रखें। यदि जरूरत हो तो बाड़े में धान की अधिक भूसी डालें। यदि बाहरी जगह की जरूरत हो तो, 40 पक्षियों के लिए 40ft x 100 ft क्षेत्रफल का स्थान बनाएं। चारे आसानी से साफ हो सकें ताकि बाड़े में सीलन न रहे। छोटे पक्षियों को हाथों से दोनों तरफ से कस कर पकड़ें ताकि वे सुरक्षित रहें। कम वयस्क और वयस्क पक्षियों को दोनों तरफ से पंखों से पकड़ा जा सकता है। पक्षी को कभी टांगें मारने का मौका न दें। ये बगल की तरफ और आगे की ओर टांग मार सकते हैं। इसलिए बेहतर सुरक्षा और मजबूत पकड़ पक्षी और व्यक्ति दोनों को नुकसान से बचाता है।
ऐसा करें
  • पक्षियों की निगरानी, उनके आहार और पानी की व्यवस्था को देखने के लिए दिन में कम से कम एक बार उन्हें जरूर देख लें।
  • उनके पैरों में आने वाली समस्या और ड्रॉपिंग पर ध्यान रखें। बीमार पक्षी की पहचान कर उन्हें स्वस्थ पक्षी से अलग रखें।
  • उनके पालन में सभी प्रचलनों का प्रयोग करें। वयस्क पक्षियों से निकटता न बनाएं।
ऐसा न करें
  • तेज और नुकीली चीजों को पक्षियों के समीप न रखें। ये पक्षी शरारती किस्म के होते हैं और अपने आस-पास की किसी भी वस्तु को उठा सकते हैं।
  • गर्म मौसम में उन्हें टीका देने या अन्य कार्यों के लिए कभी न उठाएं।
  • पूरा दिन उन्हें ठंडा और साफ पानी उपलब्ध कराएं।

प्रजनन प्रबंधन

एमू पक्षी यौन रूप से 18-24 महीने में परिपक्व हो जाते हैं। नर और मादा की संख्या का अनुपात 1:1 रखें। बाड़े में जोड़ा खाने की स्थिति में उनकी जोड़ी उनकी अनुकूलता को ध्यान में रख कर बनानी चाहिए। ‘जोड़ा खाने’ के दौरान स्थान का क्षेत्रफल 2500 sft (100 x 25) प्रति जोड़ा होना चाहिए। एकांत देने के लिए वृक्ष और पौधे दिए जा सकते हैं ताकि उनके बीच यौन संपर्क हो सके। प्रजनन आहार को प्रजनन कार्यक्रम से 3-4 हफ्ते पहले ही उन्हें दें, साथ ही उन्हें अच्छी उर्वरता और अंडे की सफलता के लिए खनिज और विटामिनों की भी मात्रा दें। सामान्यतः वयस्क एमू प्रति दिन 1 किलोग्राम चारा खाता है। पर प्रजनन काल में भोजन की मात्रा कम हो जाती है। इसलिए पोषण तत्त्वों की मात्रा सुनिश्चित करें।

एमू अपना पहला अंडा ढाई वर्ष की आयु में देता है। अंडे अक्टूबर से फरवरी के बीच, खास कर ठंडे समय में दिए जाते हैं, जो शाम 5.30 बजे से 7 बजे के बीच दिए जाते हैं। सामान्यतः एक मादा एमू पहले वर्ष लगभग 15 अंडे दे सकती है। बाद के वर्षों में यह बढ़ कर 30-40 तक हो जाते हैं। औसतन एक वर्ष में 25 अंडे प्राप्त होते हैं, जिनका वजन 475-65 ग्राम के करीब होता है। एमू के अंडे हरे होते हैं और ये मार्बल की तरह दिखते हैं। रंग गहरे, मध्यम या गहरे हरे तक हो सकते हैं। अंडे की सतह खुरदरे या चिकने हो सकते हैं। अधिकतर अंडे (42%) मध्यम हरे और खुरदरी सतह वाले होते हैं।
अंडे के उचित और मजबूत कैल्शिकरण के लिए सामान्य चारे और प्रजनन चारे में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम (2.7%) की आवश्यकता होती है। पर अंडे देने से पहले के समय में अधिक मात्रा में कैल्शियम खिलाने से अंडे के उत्पादन पर विपरीत असर पड़ता है और इससे नर उर्वरता भी घटती है। अतिरिक्त कैल्शियम को ग्रिट और कैल्साइट पाउडर के रूप में, अलग से दिया जाना चाहिए। बाड़े से अंडों को नियमित एकत्र करना चाहिए। यदि अंडे मिट्टी में दिए जाते हैं तो उन्हें सैंड पेपर से रगड़ कर रूई से साफ कर लें। अंडों को 60 डिग्री फॉरेनहाइट तापमान वाले कमरे में रखें। अंडों से सही तरह चूजे निकलने के लिए उन्हें 10 दिन से अधिक भंडारित न करें। अंडों से सही तरह चूजे निकलने के लिए कमरे के तापमान को प्रत्येक 3 से 4 दिनों पर सेट करना चाहिए।

इंक्यूबेशन और अंडों से चूजे का बाहर आना (हैचिंग)

उर्वर अंडों को कमरे के तापमान पर सेट करें। उन्हें क्षैतिज या हल्के ढाल वाले ट्रे में रखें, जिनमें पंक्तियां बनी हों। अंडों के इंक्यूबेटर को अच्छी तरह से साफ कर उसे संक्रमण मुक्त कर लें। मशीन को चालू कर उसे सही तापमान पर सेट कर लें, यानि शुष्क बल्ब तापमान 96-97 डिग्री फॉरेन्हाइट तथा नम बल्ब तापमान 78-80 (लगभग 30 से 40 डिग्री RH) डिग्री तापमान। अंडे के ट्रे को सावधानीपूर्वक सेटर में रखें। इंक्यूबेटर के सेट किए तापमान तथा सही आर्द्रता के साथ तैयार हो जाने के बाद, यदि जरूरत हो तो, आइडेंटिफिकेशन स्लिप को तिथि तथा पेडिग्री सेट करने के लिए रखें। इंक्यूबेटर को 20 ग्राम पोटाशियम परमैंगनेट और 40 मिली. फॉर्मलीन के साथ धूम्रीकृत करें। यह प्रति 100 वर्ग फीट के स्थान में किया जाना चाहिए। 48 दिनों तक अंडों को उलटते-पलटते रहें। 49वें दिन के बाद से ऐसा करना बंद कर दें और पिपिंग के लिए देखते रहें। 52वें दिन इंक्यूबेशन अवधि खत्म हो जाती हैं। चूजों को सूखने की जरूरत होती है। उन्हें कम से कम 24 से 72 घंटे तक हैचर कंपार्टमेंट में रखें। सामान्यतः अंडे की फूटने की सफलता 70% या उससे भी अधिक होती है। इसकी कम सफलता के कई कारण होते हैं। सही प्रजनन कारक आहार से स्वस्थ चूजे निकलते हैं।

आहार

एमू को अपने सही विकास और उत्पादन के लिए संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। किताबों के अनुसार कुछ पोषण आवश्कता को तालिका 1 और 3 में दिखाया गया है। आहार को सामान्य पॉल्ट्री आहार की तरह ही तैयार किया जा सकता है (तालिका 2)। एमू के पालन में 60 से 70% खर्च आहार पर ही होता है, अतः कम कीमत वाले आहार से यह खर्च कुछ घटाया जा सकता है। व्यावसायिक फार्मों में, प्रति एमू उपयोग किए जाने वाले आहार की मात्रा 394-632 प्रति वर्ष होती है, जो औसतन 527 किलो ग्राम होती है। आहार की कीमत प्रति किग्रा, क्रमशः (गैर-प्रजनन और प्रजनन काल में) 6.50 से 7.50 रु होती है
विभिन्न आयु समूह वाले एमू के लिए सुझाई गई आहार मात्रा
पारामीटर
स्टार्टर 10-14 हफ्ते की आयु या 10 किग्रा शरीर का भार
वृद्धि कारक (ग्रोअर)
15-34 हफ्ते की आयु या 10-25किग्रा शरीर का भार
प्रजननकारी (ब्रीडर)
कच्चा प्रोटीन %
20
18
20
लायसीन%
1.0
0.8
0.9
मीथियोनीन%
0.45
0.4
0.40
ट्रिप्टोफैन %
0.17
0.15
0.18
थ्रेओनीन %
0.50
0.48
0.60
कैल्शियम % मिनी
1.5
1.5
2.50
कुल फॉस्फोरस %
0.80
0.7
0.6
सोडियम क्लोराइड%
0.40
0.3
0.4
कच्चा रेशा  (अधिकतम) %
9
10
10
विटामिन A(IU/kg)
15000
8800
15000
विटामिन D 3 (ICU/kg)
4500
3300
4500
विटामिन E (IU/kg)
100
44
100
विटामिन B 12 (µ g/kg)
45
22
45
विटामिन (mg/kg)
2200
2200
2200
विटामिन (mg/kg)
30
33
30
जिंक (mg/kg)
110
110
110
मैंगनीज (mg/kg)
150
154
150
आयोडीन(mg/kg)
1.1
1.1
1.1
एमू के आहार (kg/100kg)
घटक
स्टार्टर
वृद्धि कारक (ग्रोअर)
समापन कारक (फिनिशर)
प्रजनन कारक (ब्रीडर)
रखरखाव
(मेंटेनेस)
मक्का
50
45
60
50
40
सोयाबीन आहार
30
25
20
25
25
DORB
10
16.25
16.15
15.50
16.30
सूर्यमुखी
6.15
10
0
0
15
डाइ-कैल्शियम फॉस्फेट
1.5
1.5
1.5
1.5
1.5
कैल्साइट पाउडर
1.5
1.5
1.5
1.5
1.5
शेल ग्रिट
0
0
0
6
0
नमक
0.3
0.3
0.3
0.3
0.3
सूक्ष्म खनिज तत्त्व
0.1
0.1
0.1
0.1
0.1
विटामिन
0.1
0.1
0.1
0.1
0.1
कोकियोडायोस्टैट
0.05
0.05
0.05
0
0
मेथियोनाइन
0.25
0.15
0.25
0.25
0.15
कोलाइन क्लोराइड
0.05
0.05
0.05
0.05
0.05

स्वास्थ्य की देखभाल तथा प्रबंधन

रेटाइट पक्षी सामान्यतः मजबूत होते हैं तथा लंबे समय तक जीवित (80 % जीवन क्षमता) रहते हैं। मृत्यु और स्वास्थ्य की समस्या मुख्यतः चूजों तथा छोटे एमू में होती। इन समस्याओं में भूखा रहना, कुपोषण, आंत की समस्या, पैरों की विकृति, कोलाई संक्रमण तथा क्लोस्ट्राइडियल संक्रमण शामिल हैं। इन समस्याओं का मुख्य कारण है अनुपयुक्त पालन बाड़ा या पोषण, दवाब, अनुपयुक्त संचालन और आनुवंशिक रोग। अन्य रोगों में शामिल हैं- रिनाइटिस, कैंडिडायसिस, साल्मोनेला, अस्पर्जिलोसिस, कोकिडिओसिस, लाइस और ऐस्केरिड संक्रमण। आंतरिक तथा बाह्य कीड़ों को मारने के लिए आइवरमेक्टिन की खुराक दी जा सकती है। यह 1 महीने की शुरुआत पर 1-1 महीने के अंतराल पर दिया जा सकता है। एमू में एंट्राइटिस तथा वायरल इस्टर्न एक्विन एन्सेफालोमाइलाइटिस (EEE) का रोग भी देखा जाता है। भारत में अब तक रानीखेत बीमारी के कुछ मामले देखे गए हैं, पर उनकी संपूर्ण पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि पक्षियों को R.D के लिए लसोटा टीके 1 हफ्ते की उम्र में, 4 साल की उम्र में (लसोटा बूस्टर); 8,15 और 40 हफ्तों में मुक्तेस्वर स्ट्रेन से बेहतर प्रतिरक्षी क्षमता बनती है।

एमू के उत्पाद

भारत में एमू तथा शतुरमुर्ग का मांस उच्च गुणवत्ता वाला माना जाता है, जिसमें कम चर्बी, कम कॉलेस्ट्रॉल होते हैं, और ये अच्छे स्वाद वाला होता है। जांघ और निचले पैर की बड़ी मांसपेशी अच्छी मानी जाती है। एमू की खाल उम्दा और मजबूत प्रकार की होती है। पैर की त्वचा विशेष पैटर्न की होती है, इसलिए कीमती होती है। एमू की चर्बी से तेल का उत्पादन किया जाता है, जिसमें आहारीय तथा औषधीय (जलन भगाने वाले गुण) तथा कॉस्मेटिक गुण होते हैं।

अर्थशास्त्र

एमू फार्म के आर्थिक सर्वेक्षण से यह साबित होता है कि ब्रीडिंग़ स्टॉक के लिए खरीद पर आने वाला खर्च महंगा होता है (68%)। शेष खर्च फार्म (13%) तथा हैचरी (19%) में होता है। प्रति ब्रीडिंग प्रति वर्ष आहार पर 3600 रुपए का खर्चा आता है। अंडे के हैचिंग और एक दिन के चूजे के उत्पादन में क्रमशः 793 तथा 1232 रु. का खर्च आता है। प्रति जोड़े प्रति वर्ष दिए जाने वाले आहार पर (524 किग्रा) 3578 रु का खर्च आता है। बिक्री योग्य चूजों पर 2500-3000 रु. की लागत आती है। अंडे की अच्छी सफलता (80%), आहार में खर्च कम कर और मृत्युदर को घटाकर (10% से कम) अच्छा लाभ कमाया जा सकता है।

एमू के गुण

  1. एमू के गुण
  2. पालन प्रबंधन
  3. प्रजनन प्रबंधन
  4. इंक्यूबेशन और अंडों से चूजे का बाहर आना (हैचिंग)
  5. आहार
  6. स्वास्थ्य की देखभाल तथा प्रबंधन
  7. एमू के उत्पाद
  8. अर्थशास्त्र
संबंधित विषय






एटीएम/व्हाइट लेबल एटीएम- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


  1. ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) क्या है ?
  2. व्हाइट लेबल एटीएम (डबल्यूएलए) क्या होते है?
  3. एटीएम और डबल्यूएलए (व्हाइट लेबल एटीएम) के बीच क्या अंतर है?
  4. गैर–बैंक संस्थाओं को डबल्यूएलए की स्थापना करने की अनुमति देने के पीछे क्या कारण था?
  5. एटीएम/डबल्यूएलए में किस प्रकार के कार्डों का उपयोग किया जा सकता है?
  6. एटीएम/डबल्यूएलए में कौन-कौन सी सेवाएं/सुविधाएं उपलब्ध होती हैं?
  7. एटीएम/डबल्यूएलए में लेनदेन कैसे किये जा सकते हैं ?
  8. व्यक्तिगत पहचान संख्या (पिन) क्‍या है?
  9. क्‍या ये कार्ड देश में किसी भी बैंक/गैर बैंक एटीएम (डबल्यूएलए) पर प्रयोग किए जा सकते हैं?
  10. क्या ग्राहक एटीएम पर कुछ मुफ्त लेनदेन के लिए भी पात्र होते हैं?
  11. क्या एटीएम पर किए गए लेनदेन के संबंध में ग्राहकों से कोई शुल्क लिया जाता है?
  12. कार्ड के खो जाने या चोरी होने पर क्‍या करना चाहिए?
  13. शिकायत दर्ज कराने के लिए ग्राहकों को संपर्क नंबर कहाँ से मिल सकता है?
  14. किसी अन्य बैंक के एटीएम/ व्हाइट लेबल एटीएम में विफल हुए लेनदेन के मामले में, जब ग्राहक के खाते से पैसे डेबिट हो गए हों तो ग्राहक द्वारा कौन से कदम उठाए जाने चाहिए?
  15. विफल एटीएम/डबल्यूएलए लेनदेन की स्थिति में ग्राहक के खाते में कार्ड जारीकर्ता बैंक द्वारा राशि पुनः जमा करने के लिए क्‍या कोई समय सीमा है?
  16. 7 कार्यदिवसों से अधिक विलंब होने पर क्‍या ग्राहक क्षतिपूर्ति के लिए पात्र हैं?
  17. यदि निर्धारित समय के भीतर ग्राहक के बैंक द्वारा शिकायत का समाधान नहीं किया जाता है / ग्राहक की संतुष्टि नहीं होती है तो ग्राहक द्वारा क्‍या कार्रवाई की जानी चाहिए?
  18. विफल / विवादित डबल्यूएलए लेन-देन के मामले में उपयोगकर्ताओं के लिए कौन सा शिकायत निवारण तंत्र उपलब्ध है?
  19. एटीएम कार्ड की वैधता अवधि समाप्त होने अथवा खाते के बंद होने की स्थिति में एटीएम कार्ड के साथ क्या किया जाना चाहिए?
  20. ग्राहक को अपने एटीएम/डबल्यूएलए लेनदेन को सुरक्षित कैसे रखना चाहिए?
  21. ग्राहकों को एटीएम/डबल्यूएलए में अपने लेनदेन सुरक्षित और प्रतिरक्षित रखने के लिए निम्नलिखित क्या करें और क्या न करें का अनुपालन करना चाहिए:

ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) क्या है ?

ऑटोमेटेड टेलर मशीन एक कंप्‍यूटरीकृत मशीन है जो कि बैंक के ग्राहकों को बैंक शाखा जाने की जरूरत के बिना ही नकदी निकालने एवं अन्य वित्तीय और गैर वित्तीय लेनदेन के लिए अपने खाते तक पहुँचने की सुविधा प्रदान करती है।

व्हाइट लेबल एटीएम (डबल्यूएलए) क्या होते है?

गैर बैंकों द्वारा स्थापित, उनके स्वामित्व वाले एवं उनके द्वारा परिचालित किए जाने वाले एटीएम को व्हाइट लेबल एटीएम कहा जाता है। गैर-बैंक एटीएम परिचालक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्राधिकृत होते हैं।

एटीएम और डबल्यूएलए (व्हाइट लेबल एटीएम) के बीच क्या अंतर है?

i) व्हाइट लेबल एटीएम परिदृश्य में, एटीएम मशीन और एटीएम परिसर में प्रदर्शित किया जाने वाला लोगो बैंक की जगह डबल्यूएलए परिचालक का होगा। तथापि, ग्राहक के लिए, डबल्यूएलए का प्रयोग करना किसी अन्य बैंक के एटीएम (कार्ड जारी करने वाले बैंक से इतर) के उपयोग करने की तरह ही होगा।
ii) वर्तमान में डबल्यूएलए में नकदी जमा को स्वीकार करने की अनुमति नहीं है।

गैर–बैंक संस्थाओं को डबल्यूएलए की स्थापना करने की अनुमति देने के पीछे क्या कारण था?

गैर–बैंक संस्थाओं को डबल्यूएलए की स्थापना करने की अनुमति देने के पीछे कारण था कि बढ़ी हुई /विस्तृत ग्राहक सेवा के लिए एटीएम के भौगोलिक विस्तार को बढ़ाया जाए।

एटीएम/डबल्यूएलए में किस प्रकार के कार्डों का उपयोग किया जा सकता है?

बैंकों द्वारा जारी किए गए एटीएम/एटीएम कम डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और ओपेन प्रीपेड कार्ड (जिनमें नकद आहरण की अनुमति है) विभिन्न लेनदेनों के लिए एटीएम/डबल्यूएलए में उपयोग किए जा सकते हैं।

एटीएम/डबल्यूएलए में कौन-कौन सी सेवाएं/सुविधाएं उपलब्ध होती हैं?

नकदी निकालने के साथ-साथ एटीएम/डबल्यूएलए ग्राहकों को कई अन्य सेवाएं/सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें से कुछ सेवाएँ निम्नलिखित हैं:
  • खाता संबंधी जानकारी
  • नकद जमा (डबल्यूएलए में नकदी जमा को स्वीकार करने की अनुमति नहीं है)
  • नियमित बिल भुगतान (डबल्यूएलए में अनुमति नहीं है)
  • मोबाइलों के लिये रिलोड वाउचरों की खरीद (डबल्यूएलए में अनुमति नहीं है)
  • छोटा / लघु विवरण
  • पिन परिवर्तन
  • चेक बुक के लिए अनुरोध

एटीएम/डबल्यूएलए में लेनदेन कैसे किये जा सकते हैं ?

एटीएम/डबल्यूएलए में लेनदेन के लिए, ग्राहक अपने कार्ड को एटीएम/डबल्यूएलए में प्रवेश/स्‍वाइप करता है और अपनी व्‍यक्तिगत पहचान संख्‍या (पिन) की प्रविष्टि करता है। समान्यतया आसान परिचालन को सुनिश्चित करने के लिए लेनदेन, विकल्प सूची के अनुसार किए जाते हैं।

व्यक्तिगत पहचान संख्या (पिन) क्‍या है?

पिन संख्यात्मक पासवर्ड है जिसे बैंक द्वारा ग्राहकों को कार्ड जारी करते समय अलग से भेज दिया जाता है/सुपुर्द कर दिया जाता है। अधिकतर बैंकों के ग्राहकों को प्रथम प्रयोग के बाद पिन बदलने की आवश्‍यकता होती है। ग्राहक को यह पिन नंबर बैंक के कर्मचारियों सहित किसी को भी नहीं बताना चाहिए। ग्राहक को नियमित अंतराल पर अपना पिन नंबर बदलते रहना चाहिए।

क्‍या ये कार्ड देश में किसी भी बैंक/गैर बैंक एटीएम (डबल्यूएलए) पर प्रयोग किए जा सकते हैं?

हाँ, बैंकों द्वारा भारत में जारी कार्डों का प्रयोग भारत में किसी भी बैंक/ व्हाइट लेबल एटीएम में किया जा सकता है।

क्या ग्राहक एटीएम पर कुछ मुफ्त लेनदेन के लिए भी पात्र होते हैं?

हाँ, दिनांक 01 नवंबर 2014 से बैंक को अपने बचत खाता धारकों को निम्नलिखित अनुसार कुछ न्यूनतम मुफ्त लेनदेन अवश्य उपलब्ध कराने होंगे:
I. किसी भी स्थान में बैंक के खुद के एटीएम में लेनदेन: बैंकों को अपने बचत बैंक खाता धारकों को एक महीने में न्यूनतम पाँच लेनदेन (वित्तीय और गैर वित्तीय दोनों को मिलाकर) अवश्य मुफ्त देने चाहिए, चाहे एटीएम किसी भी स्थान में क्यों न हो।
II. मेट्रो शहरों में किसी अन्य बैंक के एटीएम पर किए जाने वाले लेनदेन: छ: मेट्रो शहरों में उदाहरणार्थ मुंबई, नई दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरू और हैदराबाद में स्थित एटीएम के मामले में बैंकों को अपने बचत बैंक खाता धारकों को एक महीने में न्यूनतम तीन मुफ्त लेनदेन (वित्तीय और गैर-वित्तीय लेनदेनों सहित) अवश्य प्रदान करने चाहिए।
III. गैर –मेट्रो स्थानों पर किसी अन्य बैंक के एटीएम पर लेनदेन: अन्य स्थानों पर बैंकों को बचत बैंक खाता धारकों को अन्य बैंक के एटीएम पर एक महीने में न्यूनतम पाँच मुफ्त लेनदेन (वित्तीय और गैर-वित्तीय लेनदेनों सहित) अवश्य प्रदान करने चाहिए।
भारतीय रिजर्व बैंक ने केवल एटीएम पर मुफ्त लेनदेनों की न्यूनतम संख्या को अनिवार्य किया है। बैंक अपने ग्राहकों को और अधिक संख्या में मुफ्त लेनदेन प्रदान कर सकते हैं।
बुनियादी बचत बैंक जमा खाता (बीएसबीडीए) पर उपर्युक्त लागू नहीं होता है क्योंकि, बीएसबीडीए से किए गए आहरण इस प्रकार के खातों से संबन्धित शर्तों के अधीन होते हैं।

क्या एटीएम पर किए गए लेनदेन के संबंध में ग्राहकों से कोई शुल्क लिया जाता है?

हाँ, ग्राहकों से एटीएम पर किए गए लेनदेन के संबंध में शुल्क लिया जा सकता है यदि वे निर्धारित मुफ्त लेनदेनों की संख्या (जैसा कि, उपर्युक्त प्रश्न संख्या 10 के उत्तर में दर्शाया गया है) से अधिक बार लेनदेन करते हैं। यदि कोई बैंक शुल्क लेने का निर्णय लेता है तो ग्राहक के बैंक द्वारा प्रति लेनदेन अधिकतम 20/- रुपये (और सेवा कर, यदि कोई हो) शुल्क के रूप में लिए जा सकते हैं।

कार्ड के खो जाने या चोरी होने पर क्‍या करना चाहिए?

कार्ड खोने की जानकारी होने पर ग्राहक को कार्ड जारीकर्ता बैंक से तत्‍काल संपर्क करना चाहिए और बैंक से कार्ड को ब्लॉक करने का अनुरोध करना चाहिए।

शिकायत दर्ज कराने के लिए ग्राहकों को संपर्क नंबर कहाँ से मिल सकता है?

बैंकों से यह अपेक्षित है कि वे संबन्धित अधिकारियों के नाम व नंबर/टोल फ्री नंबर/हेल्पडेस्क नंबर एटीएम परिसर पर प्रदर्शित करें। इसी तरह से डबल्यूएलए में संबन्धित अधिकारियों के नाम व नंबर/टोल फ्री नंबर/हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित किए जाते हैं ताकि, किसी विफल/विवादास्पद लेनदेन के संबंध में शिकायत दर्ज कराई जा सके।

किसी अन्य बैंक के एटीएम/ व्हाइट लेबल एटीएम में विफल हुए लेनदेन के मामले में, जब ग्राहक के खाते से पैसे डेबिट हो गए हों तो ग्राहक द्वारा कौन से कदम उठाए जाने चाहिए?

ग्राहक को यथाशीघ्र, कार्ड जारी करने वाले बैंक के पास शिकायत दर्ज करानी चाहिए। यह प्रक्रिया तब भी लागू होगी जब लेनदेन अन्य बैंक/गैर बैंक के एटीएम पर किया गया हो। डबल्यूएलए के मामले में उनके एटीएम पर विफल हुए लेनदेन के संबंध में शिकायत दर्ज कराने के लिए संपर्क नंबर/ टोल फ्री नंबर भी उपलब्ध होते हैं।

विफल एटीएम/डबल्यूएलए लेनदेन की स्थिति में ग्राहक के खाते में कार्ड जारीकर्ता बैंक द्वारा राशि पुनः जमा करने के लिए क्‍या कोई समय सीमा है?

भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्देशानुसार, बैंकों द्वारा शिकायत की तारीख से 7 कार्यदिवसों के भीतर ग्राहक के खाते में राशि पुनः जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है।

7 कार्यदिवसों से अधिक विलंब होने पर क्‍या ग्राहक क्षतिपूर्ति के लिए पात्र हैं?

हाँ, दिनांक 1 जुलाई, 2011 से प्रभावी, बैंकों को विफल हुए एटीएम लेनदेन की शिकायत प्राप्त होने की तिथि से 7 कार्यदिवसों से अधिक विलंब होने पर ग्राहकों को रुपये 100/- प्रतिदिन के हिसाब से क्षतिपूर्ति करनी होगी। यह क्षतिपूर्ति ग्राहक द्वारा बिना किसी दावे के उसके खाते में जमा की जानी है। यदि लेनदेन के 30 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज नहीं की गयी है तो ग्राहक अपनी शिकायत के निवारण में होने वाले विलंब हेतु क्षतिपूर्ति का हकदार नहीं होगा।

यदि निर्धारित समय के भीतर ग्राहक के बैंक द्वारा शिकायत का समाधान नहीं किया जाता है / ग्राहक की संतुष्टि नहीं होती है तो ग्राहक द्वारा क्‍या कार्रवाई की जानी चाहिए?

यदि ग्राहक को कार्ड जारी करने वाले बैंक द्वारा शिकायत का समाधान नहीं किया जाता है तो ऐसी स्थितियों में ग्राहक स्‍थानीय बैंकिंग लोकपाल का सहारा ले सकता है।

विफल / विवादित डबल्यूएलए लेन-देन के मामले में उपयोगकर्ताओं के लिए कौन सा शिकायत निवारण तंत्र उपलब्ध है?

डबल्यूएलए के उपयोगकर्ताओं के पास भी वैसा ही शिकायत निवारण तंत्र उपलब्ध है जैसा कि बैंकों के एटीएम के उपयोगकर्ताओं के विफल / विवादित लेनदेन के लिए उपलब्ध है। जबकि, इस प्रकार के डबल्यूएलए में होने वाले विफल लेनदेनों से संबंधित प्राथमिक जिम्मेदारी कार्ड जारी करने वाले बैंक की होगी, प्रायोजक बैंक इस संबंध में आवश्यक सहायता प्रदान करेगा और इस बात को सुनिश्चित करेगा कि, वाइट लेबल एटीएम ऑपरेटर (डबल्यूएलएओ) जारीकर्ता बैंक को संगत रिकॉर्ड और सूचना उपलब्ध कराए।

एटीएम कार्ड की वैधता अवधि समाप्त होने अथवा खाते के बंद होने की स्थिति में एटीएम कार्ड के साथ क्या किया जाना चाहिए?

एटीएम कार्ड की वैधता अवधि समाप्त होने अथवा खाते के बंद होने की स्थिति में ग्राहक को कार्ड को नष्ट कर देना चाहिए। इसे फेंकने से पूर्व इसकी मैग्नेटिक स्ट्रिप/ चिप सहित कार्ड को चार हिस्सों में काट देना चाहिए।

ग्राहक को अपने एटीएम/डबल्यूएलए लेनदेन को सुरक्षित कैसे रखना चाहिए?



ग्राहकों को एटीएम/डबल्यूएलए में अपने लेनदेन सुरक्षित और प्रतिरक्षित रखने के लिए निम्नलिखित क्या करें और क्या न करें का अनुपालन करना चाहिए:

  • ग्राहकों को अपने किसी भी एटीएम/डबल्यूएलए लेनदेन को पूरी गोपनीयता में करना चाहिए।
  • एक समय में एटीएम/डबल्यूएलए किओस्क में केवल एक ही कार्ड धारक का प्रवेश/पहुँच होनी चाहिए।
  • कार्ड धारक को अपना कार्ड कभी भी किसी को नहीं देना चाहिए।
  • कार्ड के ऊपर पिन संख्या न लिखें।
  • कभी भी किसी को अपना पिन नंबर न बताएं और न ही किसी को अपना कार्ड देकर और अपना पिन नंबर बताकर मदद मांगें।
  • एटीएम में पिन दर्ज किए जाते समय किसी को भी इसे देखने न दें।
  • कभी भी ऐसे पिन का प्रयोग न करें जिसका अनुमान आसानी से लगाया जा सके उदाहरणार्थ जन्म की तिथि, पती अथवा पत्नी की जन्म तिथि अथवा फोन नंबर।
  • एटीएम/डबल्यूएलए में कभी भी कार्ड न छोड़ें।
  • एटीएम/डबल्यूएलए लेनदेन संबंधी चेतावनी प्राप्त करने के लिए कार्ड जारी करने वाले बैंक में अपना मोबाइल नंबर पंजीकृत करवाएँ। यदि खाते में कोई भी अनधिकृत कार्ड लेनदेन पाया जाता है तो इसकी सूचना तुरंत कार्ड जारी करने वाले बैंक को दी जानी चाहिए।
  • एटीएम/डबल्यूएलए से जुड़े हुए किसी अतिरिक्त उपकरण से सावधान रहें। इनका उपयोग ग्राहक के आंकड़ों को धोखे से चुराने के लिए होता है। यदि इस प्रकार का कोई उपकरण पाया जाता है तो तुरंत सुरक्षा गार्ड/बैंक/इसे चलाने वाली व्हाइट लेबल कंपनी को इसके बारे में सूचित करें।
  • एटीएम/डबल्यूएलए के आस-पास किसी संदिग्ध व्यक्ति के आने – जाने पर नज़र रखें। ग्राहक को ऐसे अनजान लोगों से सावधान रहना चाहिए जो कि उसे बातों में लगाना चाहते हैं अथवा एटीएम के संचालन में सहायता /मदद देने का प्रस्ताव करते हैं।
  • इस बात को याद रखें कि बैंक अधिकारी फोन पर कभी भी आपके कार्ड का विवरण अथवा पिन नंबर नहीं पूछेंगे। अत: यदि कोई व्यक्ति यह दर्शाते हुए कि वह आपके बैंक से है और आपको विशिंग और फिशिंग मेल भेजता है तो आप उनका प्रतिउत्तर न दें।


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